बात उन दिनों की है जब मैं गाँव में रहा करती थी। बारिश का मौसम था। बहुत सारे बच्चे गलियों में खेल रहे थे। तभी मेरे मन में इस कविता का ख्याल आया..............
कविता - वर्षा रानी..............
जब-जब आती वर्षा रानी,
गलियों में भर जाता पानी।
इसे देख बच्चे तो सारे,
आ जाते गलियों के किनारे।
न जाने वो क्या क्या बनाते,
कभी पुल तो कभी नाव बनाते।
उछल कूद और शोर मचाते,
आपस में भी खूब झगड़ते।
एक दिन जब ऐसा हुआ तो,
मैं थी उन बच्चों के पास।
उन्हें देखकर ना जाने क्यों,
मेरा मन हो गया उदास।
बच्चों को मैं पास बुलाई,
बात उन्हें मैं यह समझाई।
नन्हें-मन्हें प्यारे बच्चों,
आपस में मत करो लड़ाई।
पूर्वा कुमारी

