April 21, 2012

जादू की गुड़िया

                                 

छोटी सी गुड़िया, जादू की पुड़िया, 
कब बड़ी हो गई, पता न चला ।

आंखो के सपने, तन्हाईयों में समेटे हुए
कब किसी प्यार के काबिल हो गए, पता न चला ।

दिल के अरमानों में, प्यार के आंगन में,
कब किलकारिया गूंजने लगी पता न चला ।

समय चक्र कुछ ऐसे घूमा, साथ होकर भी
कब अलग चलने लगे, पता न चला ।

कभी समझौता का नाम दिया तो कभी त्याग का,
दुनियां जहां के रिश्ते निभाने लगे, पता न चला ।

समाज के संगत में, संस्कृतियों की रंगत में,
कब जादू की गुड़िया सिसकने लगी, पता न चला ।

आंखो के सपने,कभी दिन के उजाले में तो कभी रात के अंधेरों में
कब सिमटने लगे, इस दुनियां को, पता न चला ।

तभी अंतरमन से आवाज आया, उठ तूझे किसका इंतजार है
अपने सपनो को पंख दे और उड़ जा इस जहां में ।

रास्ते कठिन थे, हौसले बुलंद थे,
कब तूफानों ने हमें रास्ता दे दिया, पता न चला ।

अपने अस्तित्व की पहचान में अपने सपनों की उड़ान में 
मैं फिर ऐसे उड़ी कि इस वक्त को भी, पता ना चला

September 09, 2011

वर्षा रानी


बात उन दिनों  की है जब मैं गाँव में रहा करती थी। बारिश का मौसम  था।  बहुत सारे बच्चे गलियों में खेल रहे थे। तभी मेरे मन में इस कविता का ख्याल आया..............

कविता - वर्षा रानी..............

जब-जब आती वर्षा रानी,
गलियों में भर जाता पानी।
इसे देख बच्चे तो सारे,
आ जाते गलियों के किनारे।
                 न जाने वो क्या क्या बनाते,
                 कभी पुल तो कभी नाव बनाते।
                 उछल कूद और शोर मचाते,
                 आपस में भी खूब झगड़ते।
एक दिन जब ऐसा हुआ तो,
मैं थी उन बच्चों के पास।
उन्हें देखकर ना जाने क्यों,
मेरा मन हो गया उदास।
                बच्चों को मैं पास बुलाई,
                बात उन्हें मैं यह समझाई।
                नन्हें-मन्हें प्यारे बच्चों,
                आपस में मत करो लड़ाई।

                                          पूर्वा कुमारी          

    

August 27, 2011

सुबह : एक नयी शुरुआत

हर सुबह कुछ तो कहती है,
अँधेरों के साए से निकलकर,
सूरज की रोशनी से सराबोर होती है,
जरुरत है इसे समझने की दोस्तों,
जीने का नया आयाम देती है,

सपनों की दुनियाँ से
बाहर निकलकर,
हकीकत की चादर में
हमको लिपटकर,

कुछ नया करने की ख्वाहिश
लेकर आती है ये सुबह,
है इसे समझने की दोस्तो,
जीने का नया आयाम देती है.

कदम बढ़ता  है,
कदम को बढ़ाने से,
राह मिलती है,
राह को तलाशने  से,
सफल होता है  वही,
जो घबराता नहीं,
दुःख-दर्द के तुफानो से,

कुछ ऐसा ही पैगाम लेकर,
आती है सुबह,
जरुरत है इसे समझने की दोस्तों,
जीने का नया आयाम देती है,

                                - पूर्वा कुमारी

      

August 26, 2011

जिंदगी...

सभी कहते है यहाँ,
ज़िन्दगी से वफ़ा कैसे करें
आँखों में आंसू,
गम के साए में घिरे ,

ज़िन्दगी क्या है,
है तो बस यूँ ही,
जैसे तैसे कट रही,
तन्हाइयों को समेटे हुए,

मंजिल के तलाश में,
कोई भटके यहाँ कोई भटके वहाँ  
भटकते ही रह जाते हैं,
जो सही मंजिल न मिले,

जिनके बारे में  हम इतना सोचे,
वो तो कुछ समझे ही नही,
तड़प कर हम रह जाते हैं  
यादों को संजोये हुए,

ज़िन्दगी क्या है,
ज़िन्दगी एक सच है,
जो कोई समझे यहाँ,
सच्चाई का सामना करे,
ज़िन्दगी से वही वफ़ा करे.

                       -पूर्वा कुमारी